- 27 मार्च 2026
- Himanshu Kumar
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रंची की सड़कों पर तनाव का माहौल बना हुआ था जब मंगलवार की सुबह गैस एजेंसियों के सामने इकट्ठा हुए भीड़ ने आवाज उठाई। स्थिति बिगड़ने का कारण था दीर्घकालिक गैस सिलेंडर की कमी, जिससे आम लोगों की रोज़मर्रा की रसोई चौखट थम गई। 25 मार्च, 2026 को शुरू हुआ यह संकट अब तेज़ी से फैल चुका है, जहाँ लाखों गृहिणियों ने अपनी लाइनों में लंबा इंतज़ार करना मुश्किल पाया है।
गैस आपूर्ति में अचानक रुकावट का असर
सबसे पहले समस्या इस बात की थी कि डिलीवरी सिस्टम में अचानक बदलाव किया गया। नियमित रूप से 25 दिनों की कैपिंग अवधि को बढ़ाकर 35 दिनों कर दिया गया, जो सीधे तौर पर आपूर्ति चेन को प्रभावित करता है। जलक गैस एजेंसी जैसे लोकप्रिय बिंदुओं पर भीड़ जमा होने लगी, लेकिन स्टाफ ने जानकारी देने से इनकार कर दिया। यह व्यवहार लोगों के गुस्हे का कारण बना।
बेलबागान क्षेत्र में स्थिति और नाजुक हो गई। वहां के निवासियों ने एक विशिष्ट मंगलवार को सड़क जाम कर दिया क्योंकि उनकी अपेक्षाएं पूरी नहीं हुईं। सुबह 9 बजे से लगभग डेढ़ घंटे तक रास्ते बंद रहे, जिससे यातायात में गड़बड़ी पैदा हुई। लोगों का कहना था कि वे सभी प्रक्रियाओं का पालन कर रहे थे, फिर भी उन्हें अपना सिलेंडर नहीं मिला।
एजेंसियों पर हमला और प्रशासन की कार्रवाई
गुस्से में खासतौर पर वही लोग आगे आए जो अपने अधिकारों के हक़दार थे। दोरंदा में जलक गैस एजेंसी के बाहर भीड़ इकट्ठी हुई। जब दरवाजे बंद किए गए तो कुछ उपभोक्ताओं ने ऑफिस के खिड़कियां तोड़ दीं। ये घटनाएं अकेले नहीं हुईं। इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी और देवी गैस एजेंसी जैसे स्थानों पर भी बड़ी तादाद में लोग जमा थे।
उधर, रवि भट्ट, ऑपरेटर of इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी ने पुष्टि की कि डिजिटल सिस्टम में कैपिंग पीरियड 35 दिनों तक बढ़ा दिया गया था, हालांकि उन्होंने कहा कि दोपहर में इसे ठीक कर लिया गया। फिर भी, गोदामों से वाहन निकलने में देरी हुई, जो समस्या को गहरा बनाती है।
ब्लैक मार्केट और राजनीतिक दबाव
सभी समस्याओं से बेहतर यह तथ्य है कि सिलेंडर केवल नहीं मिल रहा था, बल्कि महंगी दरों पर भी मजबूर थे। सरकारी भाव लगभग 1000 रुपये होते हैं, जबकि काले बाजार में 1500 से 1700 रुपये तक का दाम लगाया जा रहा था। इस अन्याय के खिलाफ झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) जैसे दलों ने केंद्र सरकार पर हमला बोला।
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी प्रदर्शन मार्च का आयोजन किया, जो मूल रूप से कीमतों और उपलब्धता दोनों के खिलाफ था। महिलाएं इस आंदोलन की मुख्य शक्ति साबित हुईं, जिन्होंने चूईया क्षेत्र में घंटों कतार में खड़ा होकर अपनी मांग रखी।
शिकायतों का समाधान और भविष्य की योजना
प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और एक जज (Magistrate) को तैनात किया। उन्होंने आश्वासन दिया कि घर डिलीवरी फिर से शुरू होगी, लेकिन लोगों में शंकाएं अभी भी बाकी हैं। मुख्य सड़कों पर पंडक क्षेत्र में खाली सिलेंडरों को बैरिकेड के रूप में इस्तेमाल किया गया था।
अब प्रमुख सवाल यह है कि क्या यह टाइपिकल संसाधन कमी थी या प्रबंधन में चूक? विशेषज्ञों का मानना है कि गोदामों से वाहन नहीं छोड़े जाने का कारण तंत्र में तकनीकी गड़बड़ी हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
गैस सिलेंडर की कमी का मुख्य कारण क्या है?
मूल रूप से डिलीवरी कैपिंग अवधि 25 दिनों से बढ़ाकर 35 दिनों कर दी गई थी। इसके अलावा, कई गैस गोदामों से वाहन समय पर नहीं छूटे, जिससे स्थानीय एजेंसियों को आपूर्ति नहीं मिल सकी।
क्या ब्लैक मार्केट की कीमतें वास्तव में अधिक हैं?
हाँ, रेगुलेटेड प्राइस लगभग 1000 रुपये है, लेकिन उपभोक्ताओं ने रिपोर्ट्स में बताया है कि उन्हें 1500 से 1700 रुपये तक देने पड़े। यह कीमतों में भारी अंतर लोगों के लिए आर्थिक बोझ बन रहा है।
आरोप लगा कि किस पार्टी ने विरोध किया?
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से कार्यवाही की। दोनों पक्षों ने केंद्र सरकार की नीतियों और स्थानीय प्रशासन पर सवाल उठाए।
प्रशासन ने किस तरह का उपाय किया?
प्रशासन ने एक मैजिस्ट्रेट को तैनात किया और पुलिस सुरक्षा बल भी पहुंचाए गए। उन्होंने आश्वासन दिया कि घर तक डिलीवरी की व्यवस्था जल्द हो जाएगी और फंसे हुए उपभोक्ताओं की मदद करेंगे।