- 8 मई 2026
- Himanshu Kumar
- 4
तमिलनाडु की राजनीति में एक ऐसी घटना घटी है जिसका कोई पूर्व उदाहरण नहीं मिलता। विजय, जिन्हें स्क्रीन पर 'थाला' के नाम से जाना जाता है और अब नेता हैं, अपनी पार्टी तमिज़गा वेत्त्री काज़गम (TVK) के साथ सत्ता के निकट पहुंच गए हैं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती। असली झटका तब लगा जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने अपने दशकों पुराने गठबंधन साथी द्रविड़ मुन्नत्र कड़गम (DMK) को पीछे छोड़कर विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। यह निर्णय 6 मई 2026 को लिया गया, जो तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के परिणामों के बाद आया था।
यह केवल एक साधारण गठबंधन नहीं है; यह एक बड़े राजनीतिक पुनर्गठन की शुरुआत है। जहां DMK ने पिछले कई वर्षों तक राज्य में सत्ता संभाली थी, वहीं कांग्रेस का यह कदम उसकी नींव को हिला सकता है। सवाल यह है कि क्या यह केवल अस्थायी समझौता है या तमिलनाडु की राजनीति का नया चेहरा?
चुनावी परिणाम और गणितीय चुनौती
234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता होती है। 2026 तमिलनाडु विधानसभा चुनावतमिलनाडु में TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई, जिसने 108 सीटें जीतीं। हालांकि, चूंकि विजय दो क्षेत्रों से विजेता रहे थे, उन्हें एक सीट रिक्त करनी होगी। इसका मतलब है कि उनकी प्रभावी ताकत 107 सीटों तक घट गई है।
सरकार बनाने के लिए उन्हें कम से कम 11 अन्य विधायकों का समर्थन चाहिए था। यही वह बिंदु था जहां राजनीतिक गणित शुरू हुआ। Congress ने घोषणा की कि वह TVK को पूर्ण सशर्त समर्थन देगी। इस समर्थन के साथ, कांग्रेस की 5 विधायकों को जोड़ने पर कुल ताकत 112 हो जाती है। फिर भी, बहुमत की सीमा (118) तक पहुंचने के लिए अभी भी 6 सीटों की कमी है।
कांग्रेस की शर्तें और राजनीतिक रणनीति
कांग्रेस का यह कदम बिना शर्त नहीं था। गिरिश चौधरी, कांग्रेस AICC तमिलनाडु इनचार्ज ने 6 मई को जारी किए गए अपने बयान में स्पष्ट किया कि यह समर्थन लोकतंत्र और संविधान के प्रति उनके प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा, "तमिलनाडु के वोटर्स, विशेष रूप से युवाओं ने एक धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और कल्याणकारी सरकार के लिए स्पष्ट मंडेट दिया है। इसे सम्मान देना हमारा संवैधानिक दायित्व है।"
हालांकि, चौधरी ने एक कड़ी शर्त रखी: इस गठबंधन में कोई भी साम्प्रदायिक शक्ति या संगठन शामिल नहीं होगा जो भारतीय संविधान में विश्वास नहीं करता। उनका मानना था कि यह गठबंधन K. Kamaraj के सुनहरे शासन के विरासत को बहाल करने, E.V. Ramasamy Periyar द्वारा स्थापित सामाजिक न्याय के सिद्धांतों को आगे बढ़ाने और Dr. B.R. Ambedkar के संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए है।
कांग्रेस जनरल सचिव KC Venugopal ने दावा किया कि विजय ने व्यक्तिगत रूप से सरकार बनाने के लिए कांग्रेस का समर्थन मांगा था। यह बातचीत दर्शाती है कि कैसे फिल्म स्टार से राजनेता बनने वाले विजय ने अपनी छवि को बनाए रखते हुए राजनीतिक व्यावहारिकता अपनाई।
अन्य पार्टियों की भूमिका और भविष्य की योजनाएं
TVK को अभी भी 6 सीटों की आवश्यकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (CPI) और कॉम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) (CPM) जैसे बाएं दलों के पास मिलाकर 4 विधायक हैं। इसके अलावा, विदुथलाई चिरुथाइगल कच्चि (VCK) के पास 2 विधायक हैं। यदि TVK इन दोनों समूहों का समर्थन प्राप्त कर लेता है, तो गठबंधन ठीक 118 सीटों तक पहुंच जाएगा, जो बहुमत के लिए आवश्यक है।
रोचक बात यह है कि TVK नेता N. Anand ने बुधवार की सुबह Edappadi K. Palaniswami, AIADMK प्रमुख से चेन्नई में उनकी निवास स्थल पर मुलाकात की। यह मुलाकात राजनीतिक अनुमानों को बढ़ावा देती है कि शायद एक व्यापक गठबंधन की संभावना है। AIADMK, जो पहले DMK का मुख्य प्रतिद्वंद्वी था, अब इस समीकरण में कैसे फिट बैठता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
विधायकों के बदलाव को रोकने के लिए, TVK ने सभी नवनिर्वाचित विधायकों को चेन्नई के महाबलिपुरम स्थित एक रेसॉर्ट में सुरक्षित रखने का फैसला किया है। यह एक आम प्रथा है, लेकिन इस बार इसकी तीव्रता अधिक है क्योंकि हर सीट का महत्व है।
लंबी अवधि का प्रभाव
कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता केवल सरकार बनाने तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय निकाय चुनावों, लोकसभा चुनावों और राज्यसभा चुनावों तक फैला हुआ है। इसका मतलब है कि 2029 के लोकसभा चुनावों तक यह गठबंधन बना रह सकता है। यह तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव है, जहां पारंपरिक गठबंधन लंबे समय से स्थिर रहे थे।
राजनीतिक ناظرों का मानना है कि यह एक 'पोस्ट-पोल एलायंस' है, जहां पार्टियां जो पहले DMK के खिलाफ अभियान चला रही थीं, अब सरकार बनाने के लिए एकजुट हो गई हैं। इसका प्रभाव केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
Frequently Asked Questions
कांग्रेस ने DMK को छोड़कर TVK को क्यों समर्थन दिया?
कांग्रेस का मानना है कि तमिलनाडु के वोटर्स, विशेष रूप से युवाओं ने एक नई दिशा के लिए मंडेट दिया है। गिरिश चौधरी ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील सरकार के लिए इस मंडेट को सम्मान देना संवैधानिक दायित्व है। इसके अलावा, DMK के साथ पुराने गठबंधन में कांग्रेस को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था, इसलिए उन्होंने रणनीतिक बदलाव किया।
TVK को सरकार बनाने के लिए कितनी सीटों की आवश्यकता है?
234 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की आवश्यकता है। TVK की प्रभावी ताकत 107 सीटों की है (विजय की एक सीट रिक्त होने के कारण)। कांग्रेस के 5 विधायकों के साथ यह संख्या 112 हो जाती है। इसलिए, TVK को अभी भी 6 अतिरिक्त विधायकों का समर्थन चाहिए, जो संभवतः बाएं दलों (4 सीटें) और VCK (2 सीटें) से मिल सकता है।
क्या यह गठबंधन 2029 के लोकसभा चुनावों तक बना रहेगा?
हाँ, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं है। यह स्थानीय निकाय, लोकसभा और राज्यसभा चुनावों तक फैला हुआ है। इसका मतलब है कि यह गठबंधन कम से कम 2029 के लोकसभा चुनावों तक स्थिर रहने की उम्मीद है, जो तमिलनाडु की राजनीति में एक लंबे समय तक चलने वाला बदलाव है।
विधायकों को महाबलिपुरम में क्यों सुरक्षित रखा गया?
चूंकि TVK को बहुमत के लिए केवल 6 सीटों की कमी है, इसलिए किसी भी विधायक के बदलाव का प्रभाव गहरा हो सकता है। विधायकों को महाबलिपुरम के एक रेसॉर्ट में ले जाकर, TVK ने यह सुनिश्चित करना चाहा कि कोई भी बाहरी दबाव या लालच उन्हें पार्टी छोड़ने या समर्थन वापस लेने के लिए प्रेरित न कर सके। यह एक सावधानीपूर्ण कदम है ताकि सरकार गठन की प्रक्रिया बिना बाधा के पूरी हो सके।
AIADMK के साथ TVK की मुलाकात का क्या महत्व है?
TVK नेता N. Anand और AIADMK प्रमुख Edappadi K. Palaniswami की मुलाकात यह संकेत देती है कि TVK अपने विकल्पों को खुला रख रहा है। हालांकि कांग्रेस का समर्थन मिल गया है, लेकिन यदि बाएं दलों या VCK से समर्थन नहीं मिलता, तो AIADMK का सहयोग एक वैकल्पिक रास्ता हो सकता है। यह मुलाकात राजनीतिक लचीलेपन को दर्शाती है।
4 टिप्पणि
यह तो बिल्कुल राजनीतिक भूकंप है! 😡 DMK को पीछे छोड़कर विजय को समर्थन देना कांग्रेस का सबसे बड़ा बेवकूफी भरा कदम है। ये लोग अपने पुराने गठबंधन के साथियों की इतनी आसानी से धोखे कर सकते हैं, तो अगली बार वे हमें भी धोखा देंगे। यह सिर्फ एक असफल रणनीति है जो तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक बिगाड़ देगी। मैं इस पूरे खेल से घृणा करता हूं।
राजनीति में बदलाव स्वाभाविक है। जब एक गठबंधन लंबे समय तक चलता है, तो नए विकल्प उभरते हैं। क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि वोटर्स ने क्या चुना? शायद युवाओं को एक नया चेहरा चाहिए था। (:)
ये सब बस नाटक है। विजय फिल्म स्टार है अब नेता बन गया। लोग उसे देखकर मत दे रहे हैं। असली कामकाज तो कोई नहीं कर रहा। DMK भी कम ही है। सब कुछ दिखावे का है।
मुझे लगता है कि यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण क्षण है क्योंकि इससे स्पष्ट होता है कि कैसे राजनीतिक गणित अब बदल गया है। हमें यह समझना होगा कि कांग्रेस की यह रणनीति केवल एक अस्थायी उपाय नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक बदलाव की ओर इशारा करती है। यदि हम गौर करें तो पाएंगे कि DMK का प्रभाव कम हो रहा है और नए दल जैसे TVK उभर रहे हैं। इसलिए, हमें इस बदलाव को स्वीकार करना चाहिए और नई वास्तविकता को समझना चाहिए। यह केवल तमिलनाडु तक सीमित नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी असर डालेगा।