- 14 दिस॰ 2025
- Himanshu Kumar
- 12
जब सजना सजीवन ने महिला प्रीमियर लीग के पहले ही बॉल पर छक्का मारा, तो पूरा भारत रुक गया। पांच रन की जरूरत थी, एक बॉल बाकी था — और उसने एक ऐसा छक्का मारा जिसने न सिर्फ मुंबई इंडियंस को जीत दिलाई, बल्कि एक गरीब, आदिवासी लड़की की अनकही कहानी को भी राष्ट्रीय मंच पर ला दिया। ये वो लड़की है जिसने अपनी बल्ले के रूप में नारियल की पत्ती का टुकड़ा इस्तेमाल किया, जिसका घर केरल के मनंथवाडी में बाढ़ में बह गया, और जिसके माता-पिता को अपनी जाति के कारण समाज से निकाल दिया गया। आज, वह मुंबई इंडियंस की कीमती खिलाड़ी है — और भारत की ओर बढ़ते कदमों की ओर एक नई उम्मीद।
पानी के खेतों से शुरुआत
सजना सजीवन, जन्म 4 जनवरी 1995 को मनंथवाडी, केरल के एक छोटे से गांव में, कुरिचिया आदिवासी समुदाय की थीं। उनके पिता सजीवन ऑटो ड्राइवर थे, माँ शरदा घर का काम करती थीं। आय इतनी कम थी कि उनके पास बेटी के लिए बल्ला खरीदने का पैसा भी नहीं था। तो सजना ने नारियल की पत्ती (मदल) का टुकड़ा बल्ले के रूप में बना लिया। पानी के खेतों में, दोस्तों के साथ, वह प्लास्टिक की गेंद से क्रिकेट खेलने लगी। कोई कोच नहीं, कोई सुविधा नहीं — बस एक जुनून।
17 साल की उम्र में, उन्हें गौतम गंभीर से मिलने का मौका मिला — जिन्होंने उन्हें एक ऑटोग्राफ किया हुआ बल्ला दिया। "ये एक अद्भुत अनुभव था," उन्होंने कहा। उस बल्ले ने उनकी आत्मविश्वास को नहीं, बल्कि उनकी भाग्य की दिशा बदल दी।
आर्थिक और सामाजिक बाधाएं
उनके माता-पिता का अंतरजातीय विवाह उनके समुदाय के लिए "पाप" माना जाता था। उन्हें समाज से निकाल दिया गया। लेकिन सजना के लिए, उनके माता-पिता का समर्थन हमेशा अटूट रहा। "मेरे क्रिकेट के बारे में मुझे कभी इनकार नहीं किया गया," उन्होंने कहा।
9 साल की उम्र में, उन्हें एक आवासीय स्कूल भेज दिया गया। वहां वह अकेली रहती थीं, कभी-कभी घंटों रोती रहती थीं। "मैं बहुत कमजोर थी," उन्होंने कहा, "लेकिन ये सब मुझे मजबूत बनाया।"
2018 में, जब केरल में भयानक बाढ़ आई, तो उनका घर बर्बाद हो गया। उनका क्रिकेट का सपना भी डूब सकता था। लेकिन उन्होंने नहीं डरा। उसी साल, उन्होंने केरल U-23 टीम का नेतृत्व करते हुए टी20 सुपर लीग जीता — 14 विकेट और एक अपराजित शतक के साथ।
WPL में धमाका
2024 के महिला प्रीमियर लीग ऑक्शन में, मुंबई इंडियंस ने उन्हें 10 लाख से लेकर 15 लाख रुपये तक के दाम पर खरीदा — ये रकम उनके परिवार के लिए एक सपना थी।
उनका WPL डेब्यू ऐतिहासिक था। उन्होंने पहली गेंद पर छक्का मारा। पांच रन की जरूरत थी, आखिरी बॉल बाकी थी। उन्होंने उसे बाहर भेज दिया। मैच जीत गया। टीम के कोच ने कहा, "हम जानते थे कि वह फिनिशर है, लेकिन इतनी तेजी से?"
19 मैचों में, 138 रन, स्ट्राइक रेट 145.26 — और टूर्नामेंट में दूसरा सबसे अच्छा स्ट्राइक रेट (158.18)। उन्होंने यूपी वॉरियर्ज़ के खिलाफ एक शानदार कैच लिया — जिसके लिए उन्हें "सीजन का सर्वश्रेष्ठ कैच" अवॉर्ड मिला।
भारतीय टीम की ओर एक कदम
उनका प्रदर्शन इतना अच्छा रहा कि उन्हें भारतीय टीम के लिए नामांकित किया गया। अब वह एक नई नेता हैं — न सिर्फ टीम के लिए, बल्कि लाखों ऐसी लड़कियों के लिए जिनके पास बल्ला नहीं, बल्कि नारियल की पत्ती है।
वह कुरिचिया समुदाय की दूसरी खिलाड़ी हैं जिन्होंने WPL में पदार्पण किया — मिन्नू माणि के बाद। ये एक छोटा सा आंकड़ा है, लेकिन इसका असर विशाल है।
क्यों ये कहानी मायने रखती है?
सजना की कहानी केवल एक खिलाड़ी की नहीं, बल्कि एक समाज की जीत है। जब एक आदिवासी लड़की, जिसके पिता ऑटो ड्राइवर हैं, जिसका घर बाढ़ में बह गया, जिसके माता-पिता समाज से निकाल दिए गए, वह भारत के सबसे बड़े क्रिकेट टूर्नामेंट में एक छक्के से नाम कमाती है — तो ये सिर्फ खेल की बात नहीं।
ये एक संदेश है: जब तक आपके अंदर जुनून है, तब तक आपके पास बल्ला नहीं होना भी बाधा नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सजना सजीवन किस आदिवासी समुदाय से हैं?
सजना सजीवन कुरिचिया आदिवासी समुदाय से हैं, जो केरल के वायनाड जिले के वनों और पहाड़ों में रहते हैं। ये समुदाय पारंपरिक रूप से खेती और जंगली उत्पादों पर निर्भर रहता है। उनके लिए खेल का सपना दुर्लभ है, लेकिन सजना ने इसे साकार किया है।
WPL में उनका सबसे यादगार पल क्या था?
WPL 2024 में उनका सबसे यादगार पल था — जब उन्होंने अपने पहले ही बॉल पर, आखिरी बॉल पर, पांच रन की जरूरत के साथ एक छक्का मारा। ये वो पल था जब उन्हें भारत ने देखा। इसके बाद उनके सोशल मीडिया फॉलोअर्स 500% बढ़ गए।
उनके माता-पिता ने उनके क्रिकेट के लिए क्या बलिदान किया?
उनके पिता सजीवन ने अपनी ऑटो ड्राइविंग की आय में से बचत करके उनके टूर्नामेंट यात्रा के लिए छोटे-छोटे पैसे दिए। जब उन्हें 150 रुपये दैनिक भत्ता मिला, तो वह घर ले आईं। उनकी माँ शरदा ने खुद बनाए बल्ले को रखने के लिए एक लकड़ी का बक्सा बनाया — जो आज भी उनके घर में रखा है।
2018 की बाढ़ ने उनके क्रिकेट पर क्या प्रभाव डाला?
2018 की बाढ़ में उनका घर बर्बाद हो गया। उन्हें अस्थायी शिफ्ट में रहना पड़ा। लेकिन उन्होंने उसी साल केरल U-23 टीम का नेतृत्व करते हुए टी20 सुपर लीग जीती — जिसमें उन्होंने 14 विकेट लिए। इस जीत ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
अब उनका लक्ष्य क्या है?
सजना का लक्ष्य भारतीय टीम में जगह बनाना है — खासकर एक फिनिशर के रूप में। उन्होंने कहा है, "मैं चाहती हूं कि एक गांव की लड़की जो नारियल की पत्ती से खेलती है, वह भी अपना सपना देख सके।" उनका नाम अब बालिकाओं के लिए एक प्रेरणा बन चुका है।
क्या उन्हें राष्ट्रीय टीम के लिए चुना जा सकता है?
हां, भारतीय क्रिकेट नियंत्रण बोर्ड (BCCI) के स्काउट्स उनकी नियमित प्रदर्शन और दबाव में काम करने की क्षमता पर नजर रख रहे हैं। उन्हें अभी तक टीम में नहीं चुना गया है, लेकिन वे अगले आयोजनों के लिए वॉचलिस्ट में हैं। उनका आंकड़ा: 145+ स्ट्राइक रेट — ये भारतीय टीम के लिए बहुत कीमती है।
12 टिप्पणि
ये लड़की तो असली जादूगर है। नारियल की पत्ती से शुरू करके WPL में छक्का मारना... मैंने कभी ऐसा कुछ नहीं सुना। बस देखो कैसे जुनून किसी को ऊपर ले जाता है।
अरे भाई, ये सब तो सिर्फ एक खेल की कहानी है। लेकिन जब एक आदिवासी लड़की के लिए बल्ला खरीदने के लिए पैसे नहीं होते, तो ये देश का असली बदलाव है।
क्या तुम सच में सोचते हो कि ये सब सच है? मुंबई इंडियंस ने उसे 15 लाख में क्यों खरीदा? शायद ये सब किसी बड़ी कंपनी का प्रचार है। जानते हो न, जब तक तुम एक आदिवासी नहीं हो, तुम्हें ये कहानी पसंद आती है।
अरे भाई, ये तो सिर्फ एक टीम का नाम बदलना है। देखो ये सब बनाया गया है ताकि लोग भारत के बारे में अच्छा सोचें। लेकिन असल में ये लड़की किसी बड़े बॉस की नौकरी करती है। वो बल्ला तो उसे दिया गया था, वरना नारियल की पत्ती से कैसे खेलेगी?
इस लड़की की कहानी से मुझे लगता है कि हम सब अपने अंदर की ताकत को भूल गए हैं। जब तक आपके पास जुनून है, तब तक आपके पास बल्ला नहीं होना भी बाधा नहीं है। ये बात सिर्फ क्रिकेट के लिए नहीं, बल्कि हर जीवन के लिए सच है।
अरे ये तो बहुत अच्छी बात है कि एक गरीब आदिवासी लड़की ने इतना कुछ किया, लेकिन देखो ये सब किसके लिए है? क्या हम सब इसे सिर्फ एक वीडियो के लिए देख रहे हैं या फिर इसे अपने जीवन में लाने की कोशिश कर रहे हैं? जब तक हम अपने आसपास की गरीब लड़कियों को सपोर्ट नहीं करेंगे, तब तक ये सब सिर्फ एक नाटक है।
हां बेटा, बहुत अच्छी कहानी है... लेकिन क्या तुम्हें लगता है कि ये सब बिना किसी बड़े ऑर्गनाइजेशन के हुआ? जब तक तुम एक आदिवासी हो, तुम्हें ये सब दिखाया जाता है ताकि तुम खुश रहो। असल में ये सब एक बड़ा धोखा है।
यह लड़की के जीवन की यात्रा भारतीय समाज के अंतर्गत आर्थिक और सामाजिक असमानता के विरुद्ध एक शक्तिशाली प्रतिरोध है। उसकी सफलता न केवल एक खिलाड़ी की सफलता है, बल्कि एक सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।
अरे भाई, ये सब तो बहुत बड़ी बात है। लेकिन जब तक तुम एक आदिवासी नहीं हो, तुम्हें ये सब अच्छा लगता है। असल में ये सब एक बड़ा धोखा है। उसके पिता को तो समाज से निकाल दिया गया, लेकिन अब वो टीवी पर दिख रही है। क्या ये न्याय है?
अरे, ये तो बहुत बढ़िया है, लेकिन अगर ये लड़की एक ब्राह्मण लड़की होती तो क्या इतना धूम मचाया जाता? मुझे लगता है कि ये सब बस एक नए ब्रांड के लिए है।
ये लड़की तो असली नायक है। बस इतना कहना है कि हर गांव में ऐसी लड़कियां हैं, बस उन्हें मौका चाहिए। हम सब उनके लिए खड़े हो जाएं।
मैंने इस लड़की की कहानी पढ़ी। ये सिर्फ एक खिलाड़ी की कहानी नहीं, ये एक समाज की जीत है।